Showing posts with label ved. Show all posts
Showing posts with label ved. Show all posts

Monday, 12 September 2016

वेदो, रामायण, महाभारत मे सती प्रथा

वेदो, रामायण, महाभारत मे सती प्रथा :

इमा नारी ---------जनयो योनिमग्र।।

                  (ऋग्वेद 10 /18/7)

अर्थात = ये नारियां (पति के साथ) जल रही है,  अत: पति का साथ होने के कारण अविधवा है । इन के शरीर पर घी मला हुआ है,  आंखो मे अंजन  (सुरमा) लगा है ।ये आंसूशनय है । हे अग्नि ये तुम मे प्रवेश कर रही है । ताकि ये निर्दोष और सुदर नारिया अपने पतियो से वियुकत न हो ।

रामायण मे सती प्रथा देखो :

वेदो की सती प्रथा  समर्थन रामायण ने भी किया देखो जरा गौर से पढो :-

दशरथ की मृत्यु के पश्चात माता कौशल्या कहती है कि, "मे महाराज के शरीर को आलिंगन कर अग्नि मे प्रवेश करूंगी ।

( वाल्मिकी रामायण अयोध्या कांड 66/12)

सीता को रावण जब राम का मायानिर्मित कटा सिर दिखाता है तब वह कहती है कि, " रावण, मे अपने पति के साथ सती हो जाऊगी ।

(वाल्मिकी रामायण युद्ध कांड 32/32)

महाभारत मे सती प्रथा देखो :-
महाभारत मे भी वेदो की सती प्रथा समर्थन किया :-

पांडवो का पिता राजा पांडु उस की मृत्यु पर उस की एक पत्नी माद्री ने पति के शव के साथ अपने आप को जलाया था ।

(महाभारत आदि पर्व 125/19)

कृष्ण के पिता वसुदेव की चारो पत्नियां =
देवकी ,
भद्रा,
रोहिणी,
मदिरा

ये चारों अपनी पति के जल कर मरी ।
                (मौसलपर्व 7/18)

कृष्ण की पांच पत्निया रूकमणी , गांधारी,  शैवया ,हैमवती एव जांबवती ने कृष्णा के शव के साथ अपने आप को जला लिया था ।
   (मौसलपर्व 7/73-74)

विष्णु पुराण मे भी कृष्ण की आठ पत्निया ने भी कृष्ण की मृत्यु के बाद कृष्ण के शव के साथ आग मे उनके साथ जली थी ।

          (विष्णु पुराण 5/38/2)

भागवत महापुराण के अनुसार धृतराष्ट्र की पत्नी भी गांधारी भी उसके साथ जिंदा जलाया गया ।

(भागवत पुराण अध्याय 1/13/57)

गरूडपुराण मे :-

नारी को बहकाते हुए गरूडपुराण कहता है कि औरत को आग से डरना नही चाहिए कियोंकि जब वह अपनी पति की लाश के साथ आग मे बैठती है तो उसके अंगो को जलन महसूस नही होती है । आग मे केवल पाप जलते है ।

(गरूडपुराण अध्याय 10 /42/-43 से 45 तक )

Sunday, 28 August 2016

वेदों में विज्ञान सच या झूठ

पिछली दो-तीन शताब्दियों से जैसे जैसे पश्चिमी विज्ञान ने तरक्की कर रहा  है , उन्होंने विज्ञानं के क्षेत्र में  अभूतपूर्व अविष्कार किये जिससे निश्चय ही  मानवता भला हो रहा है  । मनुष्य का जीवन सुगम और सुविधा पूर्ण हुआ है , उन्ही अविष्कारो के कारण सिमटती गई , मनुष्य के बीच दूरियाँ कम हुई। इस तरह पश्चमी अविष्कारो के लाभ से क्या क्या हुआ यह शायद आप सबको बताने की जरुरत नहीं।

यह भी सत्य है की संसार के बाकी हिस्सों में कंही विज्ञान का विरोध हुआ तो कंही समर्थन। पर भारत में इन सबसे अलग प्रतिक्रिया हुई  , धर्मगुरुओ द्वारा यह सिद्ध किया जाने लगा की फला वैज्ञानिक अविष्कार तो हमारी धर्म ग्रन्थ में था और हमारे पूर्वजो ने तो पहले ही यह खोज लिया था। इसका कारण था पश्चमी देशो के सामने अपनी हीन भावना , जब विज्ञानं की उन्नति और  पश्चमी सभ्यता के कारण तथा कथित ज्ञानी भारतीय भी अपने मुर्खता पूर्ण और अन्धविश्वासी विश्वासों और रीती रिवाजो के कारण हंसी के पात्र बने या खुद ही उन अज्ञानता का मजाक उड़ाने लगे तो आम भारतीय जो धर्म गुरुओ के शिकंजे में फंसा था उसमें  हीन भावना पैदा होने लगी। तब धर्म गुरुओ ने और जो पश्चिमी भाषा का ज्ञान रखते थे पर थे रुदीवादी उन्होंने भारतीयों को इससे बच निकालने का एक तरीका अपनाया जिससे उनकी जनता पर पकड़ भी बनी रहे और भारतीओ में हीन भावना भी कम हो जाये।

यह रास्ता था की हर पश्चिमी वैज्ञानिक अविष्कार को धर्म पुस्तको में 'पहले से ही ' दर्ज कर दिया जाये। अपने अवैज्ञानिक, रुदीवादी, अन्धविश्वासी रीतिरिवाजो को ' वैज्ञानिक' होने का कवर पहना दिया जाए। सिंदूर लगाने, चोटी रखने, व्रत- उपवास, तिलक, तीर्थ स्नान , यज्ञ आदि को बैज्ञानिक बतया जाने लगा। और तो और विमान, बारूद आदि के अविष्कार को भी धर्म पुस्तको में पहले से दर्ज बतया गया।

 

कुछ लोग तो इससे भी आगे बढ़ के यह सिद्ध करने लगे की ईश्वर कृत वेदो से ही सारा विज्ञानं लोगो तक पंहुचा है, दुनिया का सारा विज्ञानं ही वेदों में समाया हुआ है। तो उनकी इन बातो से मन में पहला प्रश्न यह उठता है की यदि धर्म पुस्तको में विज्ञानं था तो भारतीय अब तक कर क्या रहे थे? यदि वास्तव में ही वेदों में ही सारा विज्ञानं समाया हुआ था तो उसे पढने और भाष्य लिखने वालो ने इस बैज्ञानिक अविष्कार क्यूँ नही किया? 

 

एक बात यह भी फैलाई जाती है की पश्चमी देश के लोग हमारे वेद ले गए और उनको ही पढ़ के वो लोग खोज करने में सफल हुए। कितना बड़ा असत्य है यह,यदि वेदों में सच मुच विज्ञानं था तो क्या अब तक जितने भी वेद भाष्यकार हुए थे वह सब मुर्ख थे की उन्हें वैज्ञानिक फार्मूलो का पता ही नहीं चला?या फिर पश्च्यात लोगो को कोई चमत्कारिक चीज मिल गई जिससे उन्होंने वेदो के विज्ञानं को खोज लिया?

 

आज जब वेद आसानी से उपलब्ध हैं तो कोई भी इन्हें पढके यह पता लगा सकता है की कितना वैज्ञानिक हैं वेद। यदि कोई वेदों का ज्ञात मुझे बता सके की वेद के किस शब्द का अर्थ बारूद, मोबाइल, टीवी, ए सी ,ट्रक, हवाई जहाज,  मोटर साईकिल, फ्रिज,कूलर आदि उपकरण है?

वेद कितने वैज्ञानिक हैं  इसके कुछ उदहारण देखिये।

ऋग्वेद में सूर्य को घूमता हुआ बताया गया है, सूर्य के रथ में सात घोड़े बंधे हैं।

'सप्त त्वा हरितो रथे वहन्ति देव सूर्य' (ऋग्वेद, मंडल 1, सूक्त 50, मन्त्र 8)

अर्थात- सर्वप्रकाशक सूर्य, हरित नाम के साथ घोड़े रथ में तुम्हे ले जाते है

 

यह आज हर कोई जानता है की प्रथ्वी घुमती है , परन्तु वेदों में यह स्थिर है 

" य: प्रथ्वी .......... जनास इंद्र: " ( ऋग्वेद, 2/12/2)

अर्थात- हे मनुष्यों जिसने  कांपती हुई प्रथ्वी को स्थिर किया वह इंद्र है

 

ऐसे  कपोल काल्पनिक 'विज्ञानं' और भी हैं पर अभी उदहारण के लिए इतना ही। तो कहने का अर्थ यह है  पाठक स्वयं पढ़ सकते हैं की ईश्वर कृत वेद कितने 'वैज्ञानिक' थे।

 

मित्रो,मेरा उद्देश्य यह जताने का बिलकुल भी नहीं है की भारतीय विज्ञान में  प्रतिभा हीन थे , निश्चय ही वह महान चिन्तक और प्रतिभा सम्पन्न थे जिनका मैं बहुत सम्मान करता हूँ। परन्तु धर्म और विज्ञान दोनों एक दुसरे के विपरीत हैं , इस तरह से धर्म में विज्ञानं घुसा देना उचित नहीं है । आज उसी  विज्ञानं का सहारा लेके अन्धविश्वास और  रूडीवाद बढाया जा रहा है जिसका विज्ञानं हमेशा से दुश्मन रहा है।

 

धर्म गुरु उसी विज्ञानं का सहारा लेके अपना जाल और मजबूत करने पर लगे हुए हैं जिन वैज्ञानिक अविष्कारको कभी उन्होंने जहर दे दिया था । हमें उनके इस जाल को काटना होगा ताकि समाज अन्धविश्वास मुक्त हो सके।